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अधिकार और काग़ज़ात

बोर्ड परीक्षा में दिव्यांग और लर्निंग डिसेबिलिटी वाले विद्यार्थियों को छूट: राइटर, अतिरिक्त समय और आवेदन

CBSE और दूसरे बोर्ड लर्निंग डिसेबिलिटी, ऑटिज़्म और दूसरी दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों को कौन-सी छूट देते हैं: अतिरिक्त समय, राइटर, भाषा में छूट, दस्तावेज़ और समय-सीमा।

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इस ब्लॉग में
  1. 01CBSE में कौन-सी छूटें मिलती हैं?
  2. 02नई भाषा नीति और लर्निंग डिसेबिलिटी
  3. 03गणित: बेसिक और स्टैंडर्ड का क्या होगा?
  4. 04कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
  5. 05आवेदन कैसे और कब होता है?
  6. 06दूसरे बोर्डों में क्या अलग है?
  7. 07छूट मिलने के बाद: अभ्यास ज़रूरी है

बोर्ड परीक्षा में दिव्यांग विद्यार्थियों को, जिनमें लर्निंग डिसेबिलिटी (डिस्लेक्सिया, डिस्ग्राफ़िया, डिस्कैलकुलिया) और ऑटिज़्म वाले बच्चे भी शामिल हैं, कई तरह की छूट मिलती है: अतिरिक्त समय, राइटर या रीडर, भाषा या विषय चुनने में छूट। ये छूटें बोर्ड देता है, आवेदन स्कूल के ज़रिए होता है, और हर बोर्ड के नियम और समय-सीमा अलग हैं। यह गाइड सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार CBSE के नियम विस्तार से, और दूसरे बोर्डों की मुख्य बातें संक्षेप में बताती है। नियम बदलते रहते हैं, इसलिए ताज़ा सर्कुलर स्कूल से ज़रूर पुष्टि करें।

CBSE में कौन-सी छूटें मिलती हैं?

CBSE का 12 अप्रैल 2019 का सर्कुलर (CBSE/COORD/112233/2019) दिव्यांग विद्यार्थियों की छूटों का आधार है। यह RPwD अधिनियम 2016 में परिभाषित दिव्यांगताओं पर लागू होता है, जिनमें स्पेसिफ़िक लर्निंग डिसेबिलिटी और ऑटिज़्म शामिल हैं। सर्कुलर में कोई न्यूनतम प्रतिशत नहीं लिखा है। एडीएचडी का नाम सर्कुलर में नहीं है, इसलिए एडीएचडी वाले बच्चे के लिए स्कूल से साफ़ पूछें कि क्या संभव है।

  • अतिरिक्त समय (compensatory time): हर घंटे 20 मिनट, यानी तीन घंटे के पेपर में 60 मिनट, ढाई घंटे में 50 मिनट, दो घंटे में 40 मिनट।
  • राइटर (scribe) या रीडर: विद्यार्थी अपना राइटर ला सकता है या केंद्र से माँग सकता है। अपना राइटर विद्यार्थी से एक स्तर कम योग्यता का होना चाहिए। परीक्षा से दो दिन पहले राइटर से मिल सकते हैं, और इसका कोई शुल्क नहीं है।
  • अलग कमरा और अलग निरीक्षक, जब राइटर या रीडर हो।
  • एडल्ट प्रॉम्प्टर: ऑटिज़्म और लर्निंग डिसेबिलिटी के लिए सूची में है।
  • कैलकुलेटर: CBSE के पोर्टल मैनुअल के अनुसार CWSN विद्यार्थियों को बेसिक कैलकुलेटर की अनुमति है।
  • भाषा: कक्षा 10 में दो की जगह एक अनिवार्य भाषा, और तीसरी भाषा से छूट।
  • विषय चुनने में लचीलापन: 2027 की परीक्षाओं की योजना में दिव्यांग विद्यार्थी गणित और विज्ञान की जगह दूसरे सूचीबद्ध विषय चुन सकते हैं।

कंप्यूटर या लैपटॉप की सुविधा पर 2019 की तालिका और मौजूदा पोर्टल की स्थिति साफ़ नहीं है; ज़रूरत हो तो स्कूल से पूछें। 2028 की नई योजना में गणित और विज्ञान को सभी के लिए अनिवार्य बताया गया है; दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उसमें क्या छूट होगी, यह भी स्कूल से पूछें।

नई भाषा नीति और लर्निंग डिसेबिलिटी

2026-27 से CBSE में कक्षा 9 से तीसरी भाषा (R3) अनिवार्य है, जिसका मूल्यांकन स्कूल के अंदर होता है। CBSE के 2026-27 के पाठ्यक्रम दस्तावेज़ के अनुसार प्रमाणित स्पेसिफ़िक लर्निंग डिसेबिलिटी वाले विद्यार्थियों को परीक्षा उपनियमों के अनुसार दूसरी और तीसरी भाषा (R2 और R3) से छूट दी जा सकती है। यह छूट कैसे और कब लेनी है, स्कूल से कक्षा 9 की शुरुआत में ही पूछ लें।

गणित: बेसिक और स्टैंडर्ड का क्या होगा?

कक्षा 10 में गणित बेसिक और गणित स्टैंडर्ड का विकल्प सभी विद्यार्थियों के लिए था, सिर्फ़ दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए नहीं। CBSE के अनुसार 2026-27 में कक्षा 10 में पढ़ने वाले विद्यार्थी गणित बेसिक लेने वाले आख़िरी बैच हैं। उसके बाद सबके लिए एक साझा गणित का पेपर होगा, और एक वैकल्पिक 'मैथमैटिक्स एडवांस्ड' पेपर, जिसके अंक कुल में नहीं जुड़ेंगे।

ध्यान रखें: बेसिक गणित गणित से छूट नहीं है, यह भी गणित की परीक्षा है। दिव्यांग विद्यार्थियों को गणित छोड़ने का विकल्प दिव्यांगता वाली योजना से मिलता है, बेसिक गणित से नहीं।

कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?

2019 के सर्कुलर के अनुसार CBSE इनमें से किसी का भी दिव्यांगता प्रमाणपत्र स्वीकार करता है: सरकारी अस्पताल (मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल सर्जन या मेडिकल सुपरिंटेंडेंट), राष्ट्रीय संस्थान, या Rehabilitation Council of India या केंद्र/राज्य सरकार में पंजीकृत प्रैक्टिशनर या संस्था। सर्कुलर कहता है कि किसी भी जगह के सक्षम प्राधिकारी का प्रमाणपत्र स्वीकार किया जाएगा। पोर्टल पर एक PDF (2 MB तक) अपलोड होती है।

प्रमाणपत्र कितना पुराना चल सकता है, इसका कोई नियम हमें सर्कुलर में नहीं मिला। आकलन (assessment) और प्रमाणपत्र का फ़र्क, और UDID कार्ड के बारे में, हमारी अंग्रेज़ी गाइड UDID card and disability certificate में है।

आवेदन कैसे और कब होता है?

आवेदन परिवार सीधे बोर्ड को नहीं करता। दिव्यांगता की श्रेणी कक्षा 9 (और 11) के रजिस्ट्रेशन के समय दर्ज होनी चाहिए। फिर स्कूल List of Candidates (LOC) में विद्यार्थी को CWSN के रूप में चिह्नित करता है और पोर्टल पर सुविधाएँ चुनता है। यह एक ही बार का विकल्प है, बाद में सुधार नहीं होता। CBSE का क्षेत्रीय कार्यालय मंज़ूरी देता है, और मंज़ूर सुविधाएँ एडमिट कार्ड पर छपती हैं।

2027 की परीक्षाओं के लिए CBSE के सर्कुलर के अनुसार LOC 24 सितंबर से 21 अक्टूबर 2026 तक जमा होगी (विलंब शुल्क के साथ 30 अक्टूबर तक), और CWSN सुविधाओं का दावा LOC जमा करने से पहले करना है। LOC जमा होने के बाद छूट के दावे पर विचार नहीं होता। इसलिए अगर आपका बच्चा इस साल कक्षा 10 या 12 में है, तो आज ही स्कूल से बात करें।

कक्षा 10 की मई वाली दूसरी बोर्ड परीक्षा में सुविधाएँ सिर्फ़ उन्हीं विद्यार्थियों को मिलती हैं जो पहली परीक्षा में CWSN के रूप में दर्ज थे; नया पंजीकरण नहीं होता।

दूसरे बोर्डों में क्या अलग है?

हर बोर्ड के अपने नियम हैं। नीचे की तालिका सिर्फ़ मुख्य अंतर दिखाती है; विस्तार अंग्रेज़ी गाइडों में है।

मुख्य अंतर, सितंबर 2026 की स्थिति
बोर्डअतिरिक्त समयराइटर कौनख़ास बात
CBSEहर घंटे 20 मिनटविद्यार्थी से एक स्तर कम योग्यता वालाआवेदन LOC से पहले, पोर्टल पर
CISCE (ICSE/ISC)हर घंटे 20 मिनटकक्षा 10 के लिए उसी स्कूल का कक्षा 9 का विद्यार्थीICSE में दूसरी भाषा से छूट; वर्तनी की ग़लतियों पर अंक नहीं कटते
NIOSहर घंटे 20 मिनटकिसी भी उम्र या कक्षा का व्यक्तिगणित सभी के लिए वैकल्पिक
IGCSE (Cambridge)आम तौर पर 25% तकवयस्क, रिश्तेदार या सहपाठी नहींचार साल के भीतर की पेशेवर रिपोर्ट, स्कूल आवेदन करता है
IB10%, 25% या 50%, प्रमाण के अनुसारवयस्क, रिश्तेदार या विषय-शिक्षक नहींभाषा से कोई छूट नहीं

राज्य बोर्डों (महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना) के नियम भी अलग हैं; उनकी जानकारी state board concessions गाइड में है।

छूट मिलने के बाद: अभ्यास ज़रूरी है

अतिरिक्त समय उस बच्चे के काम का नहीं जिसने कभी उसके साथ पेपर लिखने की योजना नहीं बनाई। राइटर उस बच्चे के काम का नहीं जिसने कभी बोलकर उत्तर लिखवाना नहीं सीखा। कक्षा 9 से ही यूनिट टेस्ट और प्री-बोर्ड में वही सुविधाएँ इस्तेमाल करके अभ्यास करें, और स्कूल से पूछें कि क्या स्कूल की परीक्षाओं में भी ये सुविधाएँ मिलेंगी।

रेमेडियल टीचर या स्पेशल एजुकेटर यह अभ्यास करा सकते हैं: समय के साथ पेपर, राइटर को बोलकर उत्तर लिखवाना, और रीडर से दोबारा पढ़वाने में संकोच न करना। राइटर और अतिरिक्त समय के अभ्यास पर हमारी अंग्रेज़ी गाइड preparing a child to use a scribe में पूरी योजना है।

सवाल

CBSE में लर्निंग डिसेबिलिटी वाले बच्चे को कितना अतिरिक्त समय मिलता है?+

CBSE के 2019 के सर्कुलर के अनुसार हर घंटे 20 मिनट, यानी तीन घंटे के पेपर में 60 मिनट। यह सुविधा स्कूल के ज़रिए पोर्टल पर दावा करने और क्षेत्रीय कार्यालय की मंज़ूरी के बाद एडमिट कार्ड पर दर्ज होती है।

क्या हम अपना राइटर चुन सकते हैं?+

CBSE में हाँ, अगर राइटर विद्यार्थी से एक स्तर कम योग्यता का हो और तय घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करे। दूसरे बोर्डों के नियम अलग हैं; CISCE में कक्षा 10 के लिए उसी स्कूल का कक्षा 9 का विद्यार्थी राइटर होता है।

क्या छूट के लिए 40% दिव्यांगता का प्रमाणपत्र ज़रूरी है?+

CBSE के सर्कुलर में कोई न्यूनतम प्रतिशत नहीं लिखा है, और CISCE कुछ मामलों में बेंचमार्क से कम स्थितियों को भी शामिल करता है। अपने बोर्ड के लिए स्कूल से पूछें कि कौन-सा दस्तावेज़ चाहिए।

क्या एडीएचडी के लिए बोर्ड परीक्षा में छूट मिलती है?+

यह बोर्ड पर निर्भर है। CBSE के सर्कुलर में एडीएचडी का नाम नहीं है; महाराष्ट्र बोर्ड एडीएचडी का नाम लेता है; IB और Cambridge प्रमाण के आधार पर ध्यान से जुड़ी ज़रूरतों पर विचार करते हैं। स्कूल से अपने बोर्ड के ताज़ा नियम पूछें।

क्या मार्कशीट पर लिखा होता है कि छूट ली गई थी?+

हमने जो आधिकारिक दस्तावेज़ पढ़े, उनमें से किसी में यह नहीं लिखा कि पास-प्रमाणपत्र या मार्कशीट पर छूट का उल्लेख होता है। एडमिट कार्ड और उत्तर-पुस्तिका पर श्रेणी दर्ज होती है। कम भाषाएँ या विषय लेने पर वह मार्कशीट में स्वाभाविक रूप से दिखेगा।

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Special Minds शैक्षिक पेशेवरों का परिचय कराती है और प्लेसमेंट की निगरानी करती है। यहाँ लिखी कोई भी बात चिकित्सीय, मनोवैज्ञानिक या कानूनी सलाह नहीं है। स्कूल, बोर्ड और सरकारी संस्थाओं के नियम बदलते रहते हैं; ताज़ा नियम संबंधित संस्था से ज़रूर पुष्टि करें।

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