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IEP क्या है? स्कूल की व्यक्तिगत शिक्षा योजना (Individualised Education Plan) को कैसे पढ़ें और क्या पूछें

IEP यानी व्यक्तिगत शिक्षा योजना: भारतीय स्कूलों में इसे कौन बनाता है, इसमें क्या होना चाहिए, अच्छे लक्ष्य कैसे दिखते हैं और IEP मीटिंग में क्या पूछें।

Special Minds Indiaभारत के परिवारों के लिए6 मिनट में पढ़ेंRead in English
इस ब्लॉग में
  1. 01IEP कौन बनाता है?
  2. 02IEP में क्या-क्या होना चाहिए?
  3. 03अच्छा लक्ष्य कैसा दिखता है?
  4. 04IEP मीटिंग की तैयारी कैसे करें?
  5. 05IEP मीटिंग में क्या पूछें?
  6. 06शैडो टीचर और घर का स्पेशल एजुकेटर IEP का इस्तेमाल कैसे करते हैं?
  7. 07समीक्षा और बदलाव

IEP यानी Individualised Education Plan (व्यक्तिगत शिक्षा योजना) एक लिखित दस्तावेज़ है जिसमें स्कूल यह तय करता है कि आपके बच्चे के लिए अगले कुछ महीनों के लक्ष्य क्या हैं, उसे क्या मदद और सुविधाएँ मिलेंगी, कौन क्या करेगा, और प्रगति की समीक्षा कब होगी। ऑटिज़्म, एडीएचडी, लर्निंग डिसेबिलिटी या विकास में देरी वाले बहुत से बच्चों के लिए भारतीय स्कूल IEP बनाते हैं, पर इसका प्रारूप हर स्कूल में अलग होता है। यह गाइड बताती है कि IEP में क्या होना चाहिए, अच्छे और कमज़ोर लक्ष्यों में फ़र्क कैसे पहचानें, और IEP मीटिंग में क्या पूछें।

IEP कौन बनाता है?

भारत के ज़्यादातर स्कूलों में IEP स्कूल का स्पेशल एजुकेटर या इन्क्लूज़न कोऑर्डिनेटर बनाता है, कक्षा शिक्षक से बात करके। कुछ स्कूल बच्चे के थेरेपिस्ट की रिपोर्ट और परिवार की बात भी शामिल करते हैं; कुछ इसे सिर्फ़ स्कूल के अंदर तय करते हैं। कहीं इसे IEP कहते हैं, कहीं सहयोग-योजना (support plan) या इंडिविजुअल प्लान।

नाम से ज़्यादा ज़रूरी है कि दस्तावेज़ में क्या लिखा है और उसकी समीक्षा होती है या नहीं। अगर स्कूल कोई लिखित योजना नहीं बनाता, तो विनम्रता से पूछें कि आपके बच्चे के लक्ष्य और मदद कहाँ लिखे जाएँगे।

IEP में क्या-क्या होना चाहिए?

हर स्कूल का प्रारूप अलग होता है, पर एक अच्छे IEP में आम तौर पर ये हिस्से होते हैं।

  • अभी की स्थिति: बच्चा अभी क्या कर लेता है और कहाँ कठिनाई है, ठोस शब्दों में
  • तीन से पाँच साफ़, मापने लायक लक्ष्य, अगले टर्म या छह महीनों के लिए
  • मदद और सुविधाएँ: जैसे बैठने की जगह, छोटे निर्देश, विज़ुअल टाइमटेबल, टेस्ट में अतिरिक्त समय
  • कौन क्या करेगा: कक्षा शिक्षक, स्पेशल एजुकेटर, शैडो टीचर, घर पर परिवार
  • प्रगति कैसे मापी जाएगी और परिवार को कैसे बताया जाएगा
  • अगली समीक्षा की तारीख़

अच्छा लक्ष्य कैसा दिखता है?

अच्छा लक्ष्य बताता है कि बच्चा क्या करेगा, किस स्थिति में, कितनी मदद से, और कैसे पता चलेगा कि लक्ष्य पूरा हुआ। कमज़ोर लक्ष्य सिर्फ़ एक इच्छा होता है जिसे मापा नहीं जा सकता। नीचे की तालिका उदाहरण के तौर पर है; ये किसी बच्चे के लिए सलाह नहीं हैं, हर बच्चे के लक्ष्य उसकी ज़रूरत और आकलन से तय होते हैं।

उदाहरण: कमज़ोर और अच्छे लक्ष्य
क्षेत्रकमज़ोर लक्ष्यअच्छा लक्ष्य
कक्षा में भाग लेनाबच्चा कक्षा में ध्यान देगापूरी कक्षा को दिया निर्देश सुनकर, एक इशारे की मदद से, पाँच में से चार बार काम शुरू करेगा
पढ़नाबच्चे की पढ़ाई सुधरेगीअपने स्तर की किताब से छोटा पैराग्राफ़, ज़्यादातर शब्द सही पढ़ते हुए, बिना मदद के पढ़ेगा
लिखनालिखावट अच्छी होगीबोर्ड के बजाय दी गई छपी शीट से तीन वाक्य, हर वाक्य बड़े अक्षर से शुरू करके, ख़ुद लिखेगा
संवादबच्चा ज़्यादा बोलेगालंच के समय तस्वीर-कार्ड या शब्दों से अपनी पसंद बताएगा, हफ़्ते के ज़्यादातर दिनों में
भावनाएँ संभालनाबच्चा ग़ुस्सा नहीं करेगाबेचैनी होने पर तय इशारा दिखाकर दो मिनट के ब्रेक के लिए शांत कोने में जाएगा

IEP मीटिंग की तैयारी कैसे करें?

मीटिंग से पहले थेरेपिस्ट की ताज़ा रिपोर्ट, पिछला IEP और अपने बच्चे पर एक पन्ने का सार तैयार रखें: वह किसमें अच्छा है, क्या कठिन है, क्या मदद करता है और क्या बात बिगाड़ता है। घर पर स्पेशल एजुकेटर है तो उनसे यह पन्ना लिखवाएँ। दोनों माता-पिता जा सकें तो अच्छा है; स्कूल की सहमति हो तो शैडो टीचर या घर का स्पेशल एजुकेटर भी साथ जा सकता है।

तीन बातें पहले से तय कर लें जो आप मीटिंग से जानकर निकलना चाहते हैं। मीटिंग के उसी दिन स्कूल को छोटा संदेश भेजें: हमने क्या समझा, क्या तय हुआ, कौन क्या और कब करेगा। स्कूल मीटिंग की तैयारी पर विस्तार से हमारी अंग्रेज़ी गाइड में है।

IEP मीटिंग में क्या पूछें?

ये सवाल ज़्यादातर मीटिंगों को एक साफ़ योजना में बदल देते हैं।

  • इस टर्म के लिए मेरे बच्चे के सबसे ज़रूरी तीन लक्ष्य कौन से हैं?
  • हर लक्ष्य की प्रगति कैसे मापी जाएगी, और हमें कब बताया जाएगा?
  • कक्षा और टेस्ट में कौन-सी सुविधाएँ मिलेंगी, और क्या ये यूनिट टेस्ट में भी लागू होंगी?
  • कक्षा शिक्षक को योजना कैसे बताई जाएगी, और शिक्षक बदलने पर क्या होगा?
  • शैडो टीचर या घर का स्पेशल एजुकेटर इस योजना में क्या करेगा?
  • अगली समीक्षा कब होगी?

शैडो टीचर और घर का स्पेशल एजुकेटर IEP का इस्तेमाल कैसे करते हैं?

शैडो टीचर IEP के लक्ष्यों को कक्षा के हर दिन में लागू करता है और अपने दैनिक नोट में उन्हीं लक्ष्यों पर लिखता है। घर पर स्पेशल एजुकेटर उन्हीं लक्ष्यों को घर की दिनचर्या में अभ्यास कराता है। जब स्कूल, घर और थेरेपिस्ट तीनों एक ही लक्ष्यों पर काम करते हैं, तो बच्चे की प्रगति सबसे तेज़ और टिकाऊ होती है।

शैडो टीचर की भूमिका इस गाइड में है, और घर पर स्पेशल एजुकेटर की इस गाइड में।

समीक्षा और बदलाव

IEP एक बार बनाकर रख देने की चीज़ नहीं है। हर टर्म कम-से-कम एक बार समीक्षा होनी चाहिए: कौन-से लक्ष्य पूरे हुए, कौन-से नहीं, और क्यों। जो लक्ष्य दो समीक्षाओं तक नहीं बदलता, उस पर योजना बदलनी चाहिए, बच्चे को दोष नहीं देना चाहिए।

अगर स्कूल समीक्षा टालता रहे या लक्ष्य महीनों तक वही रहें, तो कोऑर्डिनेटर और प्रिंसिपल के साथ मीटिंग माँगें और साफ़ पूछें कि स्कूल क्या कर सकता है और क्या नहीं।

सवाल

IEP का पूरा नाम क्या है?+

Individualised Education Plan, यानी व्यक्तिगत शिक्षा योजना। यह एक लिखित योजना है जिसमें बच्चे के लक्ष्य, मिलने वाली मदद और समीक्षा की तारीख़ें होती हैं।

क्या हर स्कूल IEP बनाता है?+

नहीं, और जो बनाते हैं उनका प्रारूप अलग-अलग होता है। अगर आपके बच्चे को अतिरिक्त मदद मिल रही है, तो स्कूल से पूछें कि उसके लक्ष्य और मदद कहाँ लिखे जाते हैं और उनकी समीक्षा कब होती है।

क्या माता-पिता IEP मीटिंग में शामिल हो सकते हैं?+

ज़्यादातर स्कूल माता-पिता को बुलाते हैं, और आपको शामिल होना चाहिए। तैयारी से जाएँ, सवाल पूछें, और मीटिंग के बाद तय बातें लिखित में भेजें।

IEP की समीक्षा कितनी बार होनी चाहिए?+

कम-से-कम हर टर्म एक बार। शुरुआती महीनों में या बड़े बदलाव के बाद जल्दी समीक्षा भी उपयोगी है।

क्या IEP से बोर्ड परीक्षा में छूट मिल जाती है?+

नहीं, बोर्ड परीक्षा की छूट बोर्ड अपने नियमों और तय दस्तावेज़ों के आधार पर देता है, और आवेदन आम तौर पर स्कूल के ज़रिए होता है। फिर भी IEP और स्कूल के रिकॉर्ड यह दिखाने में मदद करते हैं कि बच्चे को लंबे समय से सहयोग मिल रहा है।

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Special Minds शैक्षिक पेशेवरों का परिचय कराती है और प्लेसमेंट की निगरानी करती है। यहाँ लिखी कोई भी बात चिकित्सीय, मनोवैज्ञानिक या कानूनी सलाह नहीं है। स्कूल, बोर्ड और सरकारी संस्थाओं के नियम बदलते रहते हैं; ताज़ा नियम संबंधित संस्था से ज़रूर पुष्टि करें।

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